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विशेषताएं
० यह किस्म पफ्त्ती मरोड़ विषाणु बिमारी के प्रति सहनशील है |
० यह किस्म जहां सिंचाई ज्यादा उपलब्ध है वहां दूसरी किस्मों से ज्यादा पैदावार देती है ।
० रूई की उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार मे उच्च भाव मिलता है।
० यह किस्म 65-70०दिनमें पकती है जिससे गेहूँ, सरसों एवं चने की बिजाई उसी खेत में की जा सकती है।
० यह किस्म उत्तरी पश्चिमी मैदानी सिंचित क्षेत्र (राजस्थान, पंजाब, हरियाना मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश ) के लिए उपयुक्त है।
विशेषताएं
० पौधे के तने मजबूत व मोटे होने के कारण आड़ी नहीं गिरती
० यह किस्म सामान्य व पछैती दोनों प्रकार की बुवाई के लिए उपयुक्त है ।
० दाने शरबती आभायुक्त सख्त व मध्यम आकार के होते हैं |
० प्रोटीन की मात्रा इसमें अन्य किस्मों से ज्यादा होती है |
०इस किस्म की औसत उपज अन्य प्रचलित किसमें जैसे राज । 48 2, राज. 3०77,
राज 3765 से अधिक पायी गयी है ।
विशेषताएं
० पौधे के तने मजबूत व मोटे होने के कारण आड़ी नहीं गिरती
० यह किस्म सामान्य व पछैती दोनों प्रकार की बुवाई के लिए उपयुक्त है ।
० दाने शरबती आभायुक्त सख्त व मध्यम आकार के होते हैं |
० प्रोटीन की मात्रा इसमें अन्य किस्मों से ज्यादा होती है |
०इस किस्म की औसत उपज अन्य प्रचलित किसमें जैसे राज । 48 2, राज. 3०77, राज 3765 से अधिक पायी गयी है ।
विशेषताएं
० पीली व भूरी रोली रोधक किस्म |
० सामान्य बुवाई वाले सिंचित क्षेत्र के लिए तथा लवणीय व क्षारीय भूमि हेतु उपयुक्त ।
० जड़ गलन रोग के प्रति सहनशील किस्म।
० दाना मध्यम मोटा एवं हल्का भूरे रंग का |
० पत्तियां नीचे झुकी हुई ।
० पकने पे बालियां झड़ती नहीं और आड़ी नहीं गिरती
० मधुमेह रोगी के लिए उपयुक्त किस्म
विशेषताएं
० यह किस्म कम गिरती है एवं बिमारियों के प्रति मध्य सहनशील है |
० कम समय में पकने के कारण इस किस्म की कटाई के बाद राया (सरसों) की फसल ली जा सकती है।
० इसमें झुलसा रोग को सहने की क्षमता भी होती है |
० सिंचित या अच्छी बरसात वाले व अच्छे निकास वाली भूमि के लिए उपयुक्त है ।
० इस किस्म में तेला (जैसिड) व सफेद मकखी का प्रकोप अन्य किस्मों से कम है ।
विशेषताएं
० यह किस्म पाला, सफेद रोली एवं तना गलन रोग के प्रति सहनशील है।
० इस किस्म की फली का छिलका मजबूत है एवं फसल पकने पर चटकती नहीं
० कम पानी में अधिक उपज |
० फलियों मोटी , दाना काला एंव चमकदार |
विशेषताएं
० यह किस्म पाला, सफेद रोली एवं तना गलन रोग के प्रति सहनशील है।
० इस किस्म की फली का छिलका मजबूत है एवं फसल पकने पर चटकती नहीं
० कम पानी में अधिक उपज |
० फलियों मोटी , दाना काला एंव चमकदार |
विशेषताएं
० कम पानी में अधिक उपज
० फलियां मोटी, दाना काला एवं चमकदार
० पाले की मार अन्य किस्मों से बहुत ही कम
० फली का छिलका मजबूत व फसल पकने पर चटकती नहीं
० सफेद रोली रोग, चेपा या मोयला अंतरप्रवाही फफूंद से बचाव
विशेषताएं
० यह किस्म पफ्त्ती मरोड़ विषाणु बिमारी के प्रति सहनशील है |
० यह किस्म जहांसिंचाई ज्यादा उपलब्ध है वहां दूसरी किस्मों से ज्यादा पैदावार देती है ।
० रूई की उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार मे उच्च भाव मिलता है।
० यह किस्म 6 5-70०दिनमें पकती है जिससे गेहूँ, सरसों एवं चने की बिजाई उसी खेत में की जा
सकती है।
० यह किस्म उत्तरी पश्चिमी मैदानी सिंचित क्षेत्र (राजस्थान, पंजाब, हरियाना मध्यप्रदेश एवं
उत्तरप्रदेश ) के लिए उपयुक्त है।
विशेषताएं
० यह किस्म पफ्त्ती मरोड़ विषाणु बिमारी के प्रति सहनशील है |
० यह किस्म जहांसिंचाई ज्यादा उपलब्ध है वहां दूसरी किस्मों से ज्यादा पैदावार देती है ।
० रूई की उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार मे उच्च भाव मिलता है।
० यह किस्म 6 5-70०दिनमें पकती है जिससे गेहूँ, सरसों एवं चने की बिजाई उसी खेत में की जा
सकती है।
० यह किस्म उत्तरी पश्चिमी मैदानी सिंचित क्षेत्र (राजस्थान, पंजाब, हरियाना मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश ) के लिए उपयुक्त है।